Artemis Hospitals में 14 वर्षीय बच्चे को लगा मैकेनिकल हार्ट, भारत का सबसे कम उम्र का LVAD मरीज बना
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LVAD Implant India
14 वर्षीय बच्चे में सफल LVAD इम्प्लांट.
एंड-स्टेज हार्ट फेलियर में जीवनरक्षक सर्जरी.
भारत में उन्नत कार्डियक तकनीक का उदाहरण.
Gurugram / हरियाणा के गुरुग्राम स्थित Artemis Hospitals ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए उज्बेकिस्तान के 14 वर्षीय बच्चे को नई जिंदगी दी है। एंड-स्टेज हार्ट फेलियर से जूझ रहे इस बच्चे में सफलतापूर्वक लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (LVAD) लगाया गया, जिससे वह भारत का सबसे कम उम्र का मरीज बन गया है जिसे यह उन्नत मैकेनिकल हार्ट इम्प्लांट किया गया है। अस्पताल के पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी विभाग के प्रमुख Dr. Aseem R. Srivastava के अनुसार, बच्चा पिछले करीब दस वर्षों से डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी नामक गंभीर हृदय रोग से पीड़ित था। इस बीमारी में हृदय की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं, जिससे हृदय शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त रक्त पहुंचाने में असमर्थ हो जाता है। समय के साथ उसकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उसे एंड-स्टेज हार्ट फेलियर घोषित किया गया और हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग लिस्ट में शामिल किया गया। लेकिन उसकी तेजी से बिगड़ती हालत और अंगों के काम करने की क्षमता पर पड़ रहे प्रभाव को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल LVAD लगाने का निर्णय लिया। यह प्रक्रिया बेहद जटिल और संवेदनशील मानी जाती है, खासकर तब जब मरीज की उम्र कम हो और शरीर पहले से कमजोर हो। सर्जरी के दौरान विशेषज्ञों की टीम ने अत्यंत सावधानी के साथ मैकेनिकल पंप को हृदय के मुख्य पंपिंग चैंबर यानी लेफ्ट वेंट्रिकल और एओर्टा से जोड़ा, ताकि रक्त का प्रवाह सुचारु रूप से पूरे शरीर में हो सके।
डिवाइस सक्रिय होते ही बच्चे के शरीर में रक्त संचार में तेजी से सुधार हुआ और उसके महत्वपूर्ण अंगों ने बेहतर तरीके से काम करना शुरू कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, यह डिवाइस कमजोर हृदय की सहायता करता है और शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण पहुंचाने में मदद करता है, जिससे मरीज की जीवन गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होता है। सर्जरी के बाद बच्चे की स्थिति लगातार बेहतर होती गई और कुछ ही दिनों में उसने चलना-फिरना शुरू कर दिया। उसकी रिकवरी उम्मीद से बेहतर रही और चिकित्सकों की निगरानी में आवश्यक जांच के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि LVAD उन मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकता है जो हार्ट ट्रांसप्लांट का इंतजार कर रहे हों या जिनके लिए तत्काल ट्रांसप्लांट संभव नहीं हो। यह डिवाइस मरीज को स्थिर रखने के साथ-साथ शरीर के अंगों को सुरक्षित रखता है और भविष्य में हार्ट ट्रांसप्लांट की संभावना को भी बनाए रखता है। इस सफल सर्जरी ने न केवल एक बच्चे को नया जीवन दिया है बल्कि यह भी साबित किया है कि भारत में आधुनिक चिकित्सा तकनीक और विशेषज्ञता का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि गंभीर हृदय रोगों के मामलों में समय पर पहचान, नियमित कार्डियक जांच और विशेषज्ञ उपचार बेहद जरूरी होता है, क्योंकि सही समय पर हस्तक्षेप करने से मरीज की जान बचाई जा सकती है। Artemis Hospitals की यह उपलब्धि भारत की उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का उदाहरण है और भविष्य में ऐसे कई मरीजों के लिए उम्मीद और विश्वास का प्रतीक बन सकती है, जिन्हें इस तरह की जीवनरक्षक तकनीक की जरूरत होती है।